मेरे स्कूल के बगल से नदी-कविता-दीपक शर्मा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Sharma

मेरे स्कूल के बगल से नदी-कविता-दीपक शर्मा-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Sharma

 

मेरे स्कूल के बगल से
एक नदी बहती है
जो इनऊझ ताल से
आदिकेशव घाट तक पहुंचने में
कई बार थकती है
कई बार रुकती है

इस गाँव में
दस-बीस घरों में
केवल एक ही हैंडपंप मिलता है
जिसका पानी सिर्फ पीने के लिए ही
उपयोग में लाया जाता है
शेष आपूर्ति नदी के जल से होती है
मल-मुत्र-गोबर के बावजूद
उनके लिए जीवनदायिनी है यह नदी
जो शहर तक पहुंचते-पहुंचते
नाले में तब्दील हो जाती है

मेरे स्कूल के बच्चे
अक्सर ही मिलते हैं
नदी के पास
वे स्कूल से भी चले जाते वहाँ
शौच के बहाने
या रेसस में,
आते-जाते वे
अक्सर ही दिख जाते हैं
नदी में नंगे नहाते हुए
या मछली पकड़ते हुए
उनकी देह से आती है
मछली की गंध।
मुझे आश्चर्य होता है
इतनी छोटी-सी उम्र मे
तैरते हुए
ये बच्चे कैसे पार कर जाते हैं नदी
नाव चलाने में भी कुशल हैं वे
किनारे पर
बाल सुखाती
या कपड़ा कचारती हुई
दिख जाती हैं कुछ औरतें
बरसात के दिनों में
जब उफान मारती है नदी
तब भी
इन बच्चों और उनकी मांओं को
नहीं लगता भय
उन्हें विश्वास होता है कि
नदी की धार उन्हें नहीं डूबोयेगी

इस नदी में
जवान, वृद्ध महिलाएं भी नहाती हैं
नदी के आसपास
झुरमुट और झाड़ियां हैं
औरते और लड़कियां
झुरमुट की आड़ में
कपड़े बदल लेती हैं
इन झाड़ियों को
कभी काटा नहीं जाता
क्योंकि उनके शौच के लिए
यही एक मात्र उपयुक्त स्थान है

कभी-कभी
इन झाड़ियों में छिपकर
कोई कुंती
किसी कर्ण को
दे जाती है
चुपके से जन्म

झाड़ियों के पीछे कभी-कभी
सुनाई दे जाती है
दुर्धर्ष इंसानी जानवरों द्वारा
हत्या और बलात्कार जैसी कुछ अप्रत्याशित घटनाएं
घटना के बाद
खून नदी के गंदले पानी में समा जाता है
मुँह में कपड़े ढूंसकर
दबा दी जाती है चीख
दिन में भी नहीं पहचाने जाते
हत्यारों के चेहरे
जिसकी खबर
अदालत या कचहरी तक
कभी नहीं जाती

 

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