मेरे यार ने शराब छोड़ दी है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

मेरे यार ने शराब छोड़ दी है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

सही सुना है मेरे यार ने शराब छोड़ दी है
लगता है मोहब्बत की जमात छोड़ दी है

नये शौक आजमाने लगा है आजकल वो
इसलिये आधी ही मेरी किताब छोड़ दी है

रोशनी से मोहब्बत कर बैठे नादां परवाने
चरागो से जल गये, अंधेरी रात छोड़ दी है

मेरे नाम के एक शक्स का जिक्र क्या हुआ
उसने करते-करते बीच मे बात छोड़ दी है

चंद खुदगर्ज़ लोगो का शहर बसाते बसाते
हर बार एक हसीं गांव ने सांस छोड़ दी है ।

 

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