मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

मेरा दर्द नग़मा-ए-बे-सदा
मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बे-निशाँ
मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले
मुझे अपना नामो-निशाँ मिले

मेरी ज़ात को जो निशाँ मिले
मुझे राज़े-नज़्मे-जहाँ मिले
जो मुझे ये राज़े-निहाँ मिले
मेरी ख़ामशी को बयाँ मिले
मुझे क़ायनात की सरवरी
मुझे दौलते-दो-जहाँ मिले

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