मेरी नींद को आग लग गई-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

मेरी नींद को आग लग गई-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

आज सोचा था कुछ नया कुछ सुकून लिखा जाए
क़ैद एक कलम को फिर से रिहा किया जाए

इश्क़ पर अब लिख नहीं पाऊंगा
मज़हब पर लिखने को ज़मीर इजाज़त नहीं देगा
राजनीति पर मैं लिखूंगा नहीं
इंसान लिखने के लायक है नहीं
और जानवर मेरा लिखा समझ नहीं पाएगा
सोचते सोचते एक और रात गुज़र गयी
एक बार फिर मेरी कलम
मुझसे शिकायत करते करते सो गई
पर मेरी नींद को आज भी आग लग गयी..!

 

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