मेरी डोली शौह दरिया-पंजाबी कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

मेरी डोली शौह दरिया-पंजाबी कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

 

(१९७४ दे हढ़-पीड़तां दे सहायता-कोश दे लई रची गई)
कल्ल्ह तांईं सानूं बाबला
तूं रक्ख्या हिक्क नाल ला
सतख़ैरां साडियां मंगियां
जद झुल्ली तत्ती वा
अज्ज कीकन वेहड़्यों टुरिया
किवें लाहे नी मेरे चा
मेरे गहने नील हत्थ पैर दे
मेरी डोली शौह दरिया
अज्ज लत्थे सारे चा
मेरी डोली शौह दरिया

नाल रुढ़दियां रुढ़ गईआं सद्धरां
नाल रोंदियां रुल गए नीर
नाल हूंझे हूंझ के लै गए
मेरे हत्थ दी लेख लकीर
मेरे चुन्नी बुक्क सवाह दी
मेरा चोला लीरो-लीर
मेरे लत्थे सारे चा
मेरी डोली शौह दरिया

सस्सी मर के जन्नत हो गई
मैं तुर के औतर हाल
सुन हाढ़े इस मसकीन दे
रब्बा पूरा कर सवाल
मेरी झोक वसे, मेरा वीर वसे
फेर तेरी रहमत नाल

कोई पूरा करे सवाल रब्बा
तेरी रहमत नाल
मेरे लत्थे सारे चा
मेरी डोली शौह दरिया

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