मेरा घर-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

मेरा घर-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

जिस घर में अब मैं रहता हूँ
वो मेरा है

इसके कमरों की
आराइश
इसके आँगन की
ज़ेबाइश
अब मेरी है

मुझसे पहले
मुझसे पहले से भी पहले

ये घर
किस-किस का अपना था
किन-किन आँखों का
सपना था
कब-कब
इसका क्या नक़्शा था?

ये सब तो
कल का क़िस्सा है,
इसका आज
मेरा हिस्सा है

आज के, कल बन जाने तक ही
मेरा भी
इससे रिश्ता है

जिस घर में
अब मैं रहता हूँ
वो मेरा है

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