मेंहदी है रचनेवाली-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

मेंहदी है रचनेवाली-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

मेंहदी है रचनेवाली, हाथों में गहरी लाली
कहें सखियां, अब कलियां, हाथों में खिलने वाली हैं
तेरे मन को, जीवन को, नई ख़ुशियां मिलने वाली हैं

हो हरियाली बन्नो
ले जाने तुझको गुईयां
आने वाले हैं सैयां
थामेंगे आ के बईयां
गूंजेगी शहनाई
अंगनाई-अंगनाई
मेंहदी है रचनेवाली…

गायें मईया और मौसी, गायें बहना और भाभी
कि मेंहदी खिल जाये, रंग लाये, हरियाली बन्नी
गायें फूफी और चाची, गायें नानी और दादी
कि मेंहदी मन भाये, सज जाये, हरियाली बन्नी
मेंहदी रूप संवारे हो, मेंहदी रंग निखारे हो
हरियाली बन्नी के आंचल में उतरेंगे तारे
मेंहदी है रचनेवाली…

गाजे, बाजे, बाराती, घोड़ा, गाड़ी और हाथी को
लायेंगे साजन, तेरे आंगन, हरियाली बन्नी
तेरी मेंहदी वो देखेंगे तो, अपना दिल रख देंगे वो
पैरों में तेरी चुपके से, हरियाली बन्नी
मेंहदी रूप संवारे, ओ मेंहदी रंग निखारे हो
हरियाली बन्नी के आंचल में उतरेंगे तारें
मेंहदी है रचनेवाली…

(ज़ुबैदा)

Leave a Reply