मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मुसलमाणु कहावणु मुसकलु जा होइ ता मुसलमाणु कहावै ॥
अवलि अउलि दीनु करि मिठा मसकल माना मालु मुसावै ॥
होइ मुसलिमु दीन मुहाणै मरण जीवण का भरमु चुकावै ॥
रब की रजाइ मंने सिर उपरि करता मंने आपु गवावै ॥
तउ नानक सरब जीआ मिहरमति होइ त मुसलमाणु कहावै ॥१॥(141)॥

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