मुशकिल में हो दसतार मेरे सर का अगर-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

मुशकिल में हो दसतार मेरे सर का अगर-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

मुशकिल में हो दसतार मेरे सर का अगर
ख़न्जर हो मेरे सर पे सितमगर का अगर
हाँ मुझको तभी जंग में आता है मज़ा
दु:शमन हो मेरे क़द के बराबर का अगर

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