मुझे तो तेरे घर का पता मालूम है-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

मुझे तो तेरे घर का पता मालूम है-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

 

मुझे तो तेरे घर का पता मालूम है
फ़िर क्यों लगता हर रस्ता गुम है

जो छोड़ गई चिरइया घोंसला
पेड़ तब से रहता बड़ा गुमसुम है

मैंने उन रिश्तों से तौबा कर लिया
जिनकी बाज़ारों में अब कि धूम है

कोई नहीं सुनता खामोशी मेरी
बस दिखावे को लगा हुजूम है

 

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