मुख ते पड़ता टीका सहित-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

मुख ते पड़ता टीका सहित-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

मुख ते पड़ता टीका सहित ॥
हिरदै रामु नही पूरन रहत ॥
उपदेसु करे करि लोक द्रिड़ावै ॥
अपना कहिआ आपि न कमावै ॥१॥
पंडित बेदु बीचारि पंडित ॥
मन का क्रोधु निवारि पंडित ॥१॥ रहाउ ॥
आगै राखिओ साल गिरामु ॥
मनु कीनो दह दिस बिस्रामु ॥
तिलकु चरावै पाई पाइ ॥
लोक पचारा अंधु कमाइ ॥२॥
खटु करमा अरु आसणु धोती ॥
भागठि ग्रिहि पड़ै नित पोथी ॥
माला फेरै मंगै बिभूत ॥
इह बिधि कोइ न तरिओ मीत ॥३॥
सो पंडितु गुर सबदु कमाइ ॥
त्रै गुण की ओसु उतरी माइ ॥
चतुर बेद पूरन हरि नाइ ॥
नानक तिस की सरणी पाइ ॥4॥6॥17॥887॥

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