मुंतज़िर उस के दिला ता-ब-कुजा बैठना-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

मुंतज़िर उस के दिला ता-ब-कुजा बैठना-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

मुंतज़िर उस के दिला ता-ब-कुजा बैठना
शाम हुई अब चलो सुब्ह फिर आ बैठना

होश रहा न क़रार दीन रहा और न दिल रहा
पास बुतों के हमें ख़ूब न था बैठना

लुत्फ़ से ऐ दिल तुझे उस के जो अबरू बिठाए
बैठियो लेकिन बहुत पास न जा बैठना

दिल की हमारी ग़रज़ बांधे है क्या बंद बंद
शोख का वो खोल कर बंद-ए-क़बा बैठना

कूचे में उस शोख़ के जाते तो हो ऐ ‘नज़ीर’
जुल में कहीं अपनी चाह तुम न जता बैठना

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