मिलजुल के बैठने की-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

मिलजुल के बैठने की-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

मिलजुल के बैठने की रवायत नहीं रही
रावी के पास कोई हलावत नहीं रही

हर ज़िन्दगी है हाथ में कश्कोल की तरह
महरूमियों के पास बगावत नहीं रही

मिस्मार हो रही है दिलों की इमारतें
अल्लाह के घरों की हिफाजत नहीं रही

मुल्क-ए-खुदा में सारी जमीनें हैं एक-सी
इस दौर के नसीब में हिज़रत नहीं रही

सब अपनी-अपनी मौत से मरते हैं इन दिनों
अब दश्त-ए-कर्बला में शहादत नहीं रही

 

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