मिटने वालों की वफा का यह सबक याद रहे-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh 

मिटने वालों की वफा का यह सबक याद रहे-शहीद भगत सिंह-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem|Kavita Shaheed Bhagat Singh

मिटने वालों की वफा का यह सबक याद रहे,
बेड़ियां पांवों में हों और दिल आजाद रहे।

एक साइर भी इनाइत न हो आजाद रहे,
साकिया, जाते हैं महफ़िल तेरी आबाद रहे।

आप का हम से हुया था कभी समाने वफ़ा,
जालम मगर वो हुया था भी घड़ी याद रहे।

बाग में ले के जनम हम ने असीरी झेली,
हम से अच्छे रहे जंगल में जो आजाद रहे।

मुझ को मिल जाए रुकने के लिए साख मेरी,
कौन कहता है कि गुलशन में न सय्याद रहे।

हुकम माली का है यह फूल न खिलने पाएं,
चुप रहे बाग में कोयल अगर आजाद रहे।

बागवान दिल से वतन को यह दुआ देता है,
मैं रहूं या ना रहूं यह चमन आबाद रहे।

(बृज नारायण चकबस्त)

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