मिज़ाज-ए-रहबर-ओ-राही! बदल गया है मियाँ-ग़ज़लें(तन्हा सफ़र की रात)-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

मिज़ाज-ए-रहबर-ओ-राही! बदल गया है मियाँ-ग़ज़लें(तन्हा सफ़र की रात)-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

मिज़ाज-ए-रहबर-ओ-राही! बदल गया है मियाँ
“ज़माना चाल क़यामत की चल गया है मियाँ”

तमाम उम्र की नज़्ज़ारगी का हासिल है
वो एक दर्द जो आँखों में ढल गया है मियाँ

कोई जुनूं न रहा जब, तो ज़िन्दगी क्या है
वो मर गया है जो, कुछ भी सँभल गया है मियाँ

बस एक मौज तह-ए-आब क्या तड़प उठी
लगा कि सारा समन्दर उछल गया है मियाँ

जब इन्क़लाब के क़दमों की गूंज जागी है
बड़े-बड़ों का कलेजा दहल गया है मियाँ

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