माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ-बाणी नामदेउ जीउ की ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji 

माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ-बाणी नामदेउ जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ ॥
हम नही होते तुम नही होते कवनु कहां ते आइआ ॥1॥

राम कोइ न किस ही केरा ॥
जैसे तरवरि पंखि बसेरा ॥1॥रहाउ॥

चंदु न होता सूरु न होता पानी पवनु मिलाइआ ॥
सासतु न होता बेदु न होता करमु कहां ते आइआ ॥2॥

खेचर भूचर तुलसी माला गुर परसादी पाइआ ॥
नामा प्रणवै परम ततु है सतिगुर होइ लखाइआ ॥3॥3॥973॥

 

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