माँ-कविता श्याम सिंह बिष्ट

माँ-कविता श्याम सिंह बिष्ट

मां तेरे आगे निशब्द में
कैसे करूं तेरा बखान
तुझे कहूं,
बहता पावन, गंगाजल
या फिर वेद, कुरान

तुम ही गुरु,
मेरे पहले ज्ञान की
तुझसे ही तो माँ
मेरी यह पहचान,

तुम ही तो हो जननी
इस प्रकृति, ब्रह्माण्ड की
तेरे समक्ष नतमस्तक
ब्रह्मा, विष्णु, महेश
व संपूर्ण यह जहान

मां रूप तेरे अनगिनत
तुम ही परिभाषा
प्रेम, त्याग की
तुम से ही
उपजित शब्द यह बलिदान,

मां तेरे आगे निशब्द में
कैसे करूं मैं,
नादान तेरा बखान
मां तुम महान,
तुम महान, तुम महान ।।

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