माँझी नौका खोल रहा है-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

माँझी नौका खोल रहा है-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

माँझी नौका खोल रहा है!

तन-मन में उत्साह भरा है,
जीवन विशद प्रवाह भरा है,
ऊर्जस्वित नस-नस में तन के मन का साहस बोल रहा है!

गायन करती नौका चल दी,
स्वागत लोल लहरियाँ करतीं,
शून्य-सरित के गायन पर वह अपना गायन तोल रहा है!

लहरें चंचल होती जातीं,
और कालिमा घिरती आती,
प्रकृति-वधू के मधु में विधि निज काली पुड़िया घोल रहा है!

आंधी के आसार दिखाते,
दूर-दूर दो पार दिखाते,
विह्वल औ’ विक्षुब्ध विकल वह निज पतवार टटोल रहा है!

किन्तु नहीँ पतवार दिखाती,
बस विस्तृत मंझधार दिखाती,
केवल आंसू ही एकाकी नयनों में अब डोल रहा है।
माँझी नौका खोल रहा है!

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