महिमा!-बनपाखी सुनो -नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

महिमा!-बनपाखी सुनो -नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

आओ
उस जगह को डाकें हम
कल जो आएगा
रत्नाकर हो वह।
इसको–
चला जाने दो
यह भी था बन्धु ज्वार,
लीप गया फेन
संग छोड़ गया सीप भार।
चलो,
लौटें अब,
खारा जल
पैर ही भिगोएगा,
बालु भरी अंजलि में
हमने कुछ पाया ही।।

 

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