महिमा न जानहि बेद-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

महिमा न जानहि बेद-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

महिमा न जानहि बेद ॥
ब्रहमे नही जानहि भेद ॥
अवतार न जानहि अंतु ॥
परमेसरु पारब्रहम बेअंतु ॥१॥
अपनी गति आपि जानै ॥
सुणि सुणि अवर वखानै ॥१॥ रहाउ ॥
संकरा नही जानहि भेव ॥
खोजत हारे देव ॥
देवीआ नही जानै मरम ॥
सभ ऊपरि अलख पारब्रहम ॥२॥
अपनै रंगि करता केल ॥
आपि बिछोरै आपे मेल ॥
इकि भरमे इकि भगती लाए ॥
अपणा कीआ आपि जणाए ॥३॥
संतन की सुणि साची साखी ॥
सो बोलहि जो पेखहि आखी ॥
नही लेपु तिसु पुंनि न पापि ॥
नानक का प्रभु आपे आपि ॥4॥25॥36॥894॥

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