महंगाई पे हास्य-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

महंगाई पे हास्य-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

घनघोर महंगाई का दौर
चलते हैं सब्ज़ीमंडी की ओर
फ़िल्मी दुनिया-सी
महंगी नज़र आती है,
आलू डैनी की तरह
आँखें दिखाता है,
गोभी भिंडी
ऐश्वर्या की तरह
कजरारे-कजरारे गाती है,
लेने जाओगे
दूर खिसक जाएगी,
आप कोई अभिषेक बच्चन
नहीं हो जो आपके पास आएगी।

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