मर्यादा पुरुषोत्तम का, यह धाम हो गया-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

मर्यादा पुरुषोत्तम का, यह धाम हो गया-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

मर्यादा पुरुषोत्तम का, यह धाम हो गया।
राम चले पथ पे, पथ राम हो गया।
आज सजी संवरी अयोध्या को देख लो।
इतिहास के पन्नों में, अमर नाम हो गया।।

चौदह कोशी पंच कोशी, हम चलते हैं।
मोतियों की माला में, राम ढूंढ़ते हैं।।
राम राज आ गया, राम आ रहे हैं।
अहिल्या तरी पग से, वही रज ढूंढते हैं।।

दीप जले जलते रहे,मन मिलाकर रखना।
सांस चले चलती रहे, लौ जला के रखना।।
राम जन्मभूमि सदा राम की रहेगी।
ईंट पे ईंट चढ़ती रहे, जय बना के रखना।।

है आर्दश जो राम के, कोई चल न सकेगा।
चलना भी चाहे राम जैसा, बन न सकेगा।।
कैकयी मातु से राम, आके गले बन गये।
अब भरत जैसा भाई, कोई बन न सकेगा।।

प्रियतम विरह में, राम ऐसे क्षुब्ध गये।
सांसे रूकने लगी, कंठ अवरूद्ध हो गये।
भगवान आके पीड़ा झेल गये धरती पे।
जब स्वमं राम राम के, बिरुद्ध हो गये।

 

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