मरने से किसी यार को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

मरने से किसी यार को -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

मरने से किसी यार को हम ने नहीं रोका ।
फ़रज़न्द-ए-वफ़ादार को हम ने नहीं रोका ।
ख़ुशनूदी-ए-करतार को हम ने नहीं रोका ।
अब देखिए सरकार को हम ने नहीं रोका ।
तुम को भी इसी राह में कुर्बान करेंगे ।
सद शुक्र है हम भी कभी ख़ंजर से मरेंगे ।

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