मयर पहाड़ बटी, सब शहर लहैगी-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht 

मयर पहाड़ बटी, सब शहर लहैगी-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht

मयर पहाड़ बटी, सब शहर लहैगी
बूजूरगू मकान हमार सब खंडर हैगी
ना क्षु अब ताल बखय, ना माल बखय
कैक ऐ मकान दिवार, कैकअ टुटी दरवाज रैगी
मयर पहार बटी, सब शहर लहैगी ।
नैताऔक पहाड़म पलायन रौकौ
सब पलान किताबम धरय रैगी
कौ हलदवाणीं, तो को दिलीही लहैगी
जो क्षि दो-चार लोग समझदार
ऊ सब शहर लहैगी
अब दोस्तो,- पहारम सिर्फ गरीब ऐ रगी
मयर पहार बटी, सब शहर लहगी ।
ना क्षु अब मनुअ रवट, न जो भात
खेत हमार सब धिरे-धिरे बंजर हैगी
पहारम शिक्षित, लोग कम रैगी
ठुल, नानतिन, सब हमार नशम रैगी
मयर पहार बटि सब शहर लहैगी ।

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