मयर पहार में बचपन दिन यस हुक्षि-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht 

मयर पहार में बचपन दिन यस हुक्षि-पहाड़ी भाषा काव्य-श्याम सिंह बिष्ट -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shyam Singh Bisht

मयर पहार में बचपन दिन यस हुक्षि
ईजक बनाई सारिक, धोतिक, रजाई हुक्षि
दुध,ठंड पाण, मनूअक रवट खाक्षि
गालिस सूराव पहन बे मोज सकूल जाक्षि
मयर गोंक पहार, बचपन यस हुक्षि ।
जितु मासप डरल, लाइन में सबहू हबै पिक्षार हूक्षी
गरमीम रातियक, तौ सरदियम खबेर सकूल हुछी
सबुक आपण, ऐक, ऐक दगरी हुक्षि,
कैक नाम, परि, तौ केक नाम हरी, बिरी हुक्षि
मयर पहाड़ में, बचपन दिन यस हुक्षि ।
को आर को पार को कनकेधार बटी उक्षि
कभत खारि धार, तो कभत बनगार हुक्षि
सबूक पास आपण गोर बकार हूक्षि
केक नाम बिनू केक ललु, हुछि
खेलम कंची, गुक्षि हुक्षि,
कभत गोरुव गाव, तो कभत चिण बाखय हुक्षि
मयर दगरिया दगै, बिताय,
मयर गों में बचपन दिन यस हुक्षि ।

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