मम्मी ! लाओ गरम पकौड़े!-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

मम्मी ! लाओ गरम पकौड़े!-डॉ. दिनेश चमोला शैलेश-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dr. Dinesh Chamola Shailesh

 

किट-किट करते
दाँत ठंड से
हवा मारती कोड़े
मम्मी ! लाओ गरम पकोड़े!

पहनो कितने
वस्त्र ऊन के
पड़ते सब हैं थोड़े
मम्मी ! लाओ गरम पकोड़े!

जीव – जंतु भी
गए कहां सब ?
चिड़िया, बंदर, घोड़े
सर्दी, मार रही ज्यों कोड़े !

फाहों सी है
झड़ी बर्फ की,
बनी लोमड़ी सिल्ली
कांपे जन, बन भीगी बिल्ली!

शान्ता से सब
पेड़ बने हैं
घर ज्यों शेखचिल्ली
गोया ठंड उड़ाए खिल्ली!

घर आंगन सब
दबे पड़े, ज्यों
चांदी की सिल्ली
शीत लहर, यह बड़ी निठल्ली !

बर्फ बने हैं
ताल – तलैया
जम गई नदिया रानी
अजब यह मौसम की मनमानी !

गर्मी में भाती
है यह सर्दी
अब मन धूप सुहाती
समझ न आती आंखमिचौनी !

 

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