ममेदम-शरीर कविता फसलें और फूल-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

ममेदम-शरीर कविता फसलें और फूल-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

मेरे चलने से
हुए हो तुम
पथ

और
रथ हुए हो तुम
मेरे रथी होने से

रात बनोगे तुम
मेरे सोने से
और प्रभात मेरे जागने से !

 

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