मन में सपने अगर नहीं होते-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मन में सपने अगर नहीं होते-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मन में सपने अगर नहीं होते
हम कभी चाँद पर नहीं होते

सिर्फ़ जंगल में ढूँढ़ते क्यों हो
भेड़िए अब किधर नहीं होते

कब की दुनिया मसान बन जाती
उसमें शायर अगर नहीं होते

किस तरह वो ख़ुदा को पाएँगे
खुद से जो बेख़बर नहीं होते

पूछते हो पता ठिकाना क्या
हम फकीरों के घर नहीं होते

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