मन की सुहेली सब करतीं सुहागिनि सु-(आलम) केलि आलम (बाल लीला)-आलम शेख -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Aalam Sheikh

मन की सुहेली सब करतीं सुहागिनि सु-(आलम) केलि आलम (बाल लीला)-आलम शेख -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Aalam Sheikh

मन की सुहेली सब करतीं सुहागिनि सु,
अंक की अँकोर दै कै हिये हरि लायौ है ।
कान्ह मुख चूमि चूमि सुख के समूह लै लै,
काहू करि पातन पतोखी दूध प्यायौ है ।
‘आलम’ अखिल लोक लोकनि को अंसी ईस,
सूनो कै ब्रह्मांड सोई गोकुल में आयौ है ।
ब्रह्म त्रिपुरारि पचि हारि रहे ध्यान धरि,
ब्रज की अहीरिनि खिलौना करि पायौ है ।।8।।

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