मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मनु हाली किरसाणी करणी सरमु पाणी तनु खेतु ॥
नामु बीजु संतोखु सुहागा रखु गरीबी वेसु ॥
भाउ करम करि जमसी से घर भागठ देखु ॥१॥
बाबा माइआ साथि न होइ ॥
इनि माइआ जगु मोहिआ विरला बूझै कोइ ॥ रहाउ ॥
हाणु हटु करि आरजा सचु नामु करि वथु ॥
सुरति सोच करि भांडसाल तिसु विचि तिस नो रखु ॥
वणजारिआ सिउ वणजु करि लै लाहा मन हसु ॥२॥
सुणि सासत सउदागरी सतु घोड़े लै चलु ॥
खरचु बंनु चंगिआईआ मतु मन जाणहि कलु ॥
निरंकार कै देसि जाहि ता सुखि लहहि महलु ॥३॥
लाइ चितु करि चाकरी मंनि नामु करि कमु ॥
बंनु बदीआ करि धावणी ता को आखै धंनु ॥
नानक वेखै नदरि करि चड़ै चवगण वंनु ॥४॥२॥(595)॥

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