मधु मंजरि-एकायन-चिन्ता अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

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मधु मंजरि, अलि, पिक-रव, सुमन, समीर-
नव-वसन्त क्या जाने मेरी पीर!
प्रियतम क्यों आते हैं मधु को फूल,
जब तेरे बिन मेरा जीवन धूल?

लाहौर, अगस्त, 1936

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