मधुर बचन समसरि न पुजस मध-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

मधुर बचन समसरि न पुजस मध-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

मधुर बचन समसरि न पुजस मध
करक सबदि सरि बिख न बिखम है ।
मधुर बचन सीतलता मिसटान पान
करक सबद सतपत कट कम है ।
मधुर बचन कै त्रिपति अउ संतोख सांति
करक सबद असंतोख दोख स्रम है ।
मधुर बचन लगि अगम सुगम होइ
करक सबद लगि सुगम अगम है ॥२५६॥

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