मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए
कोई सपना बुनो ज़िंदगी के लिए

पोंछ लो दीन दुखियों के आँसू अगर
कुछ नहीं चाहिए बंदगी के लिए

सोने चाँदी की थाली ज़रूरी नहीं
दिल का दीपक बहुत आरती के लिए

जिसके दिल में घृणा का है ज्वालामुखी
वह ज़हर क्यों पिये खुदकुशी के लिए

उब जाएँ ज़ियादा खुशी से न हम
ग़म ज़रूरी है कुछ ज़िंदगी के लिए

सारी दुनिया को जब हमने अपना लिया
कौन बाकी रहा दुश्मनी के लिए

तुम हवा को पकड़ने की ज़िद छोड़ दो
वक्त रुकता नहीं है किसी के लिए

शब्द को आग में ढालना सीखिए
दर्द काफी नहीं शायरी के लिए

सब ग़लतफहमियाँ दूर हो जाएँगी
हँस मिल लो गले दो घड़ी के लिए

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