मत छुप का वार करो-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

मत छुप का वार करो-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

मत छुप कर वार करो!

है झुकी हुई मेरी गर्दन,
है झुका हुआ मेरा तन-मन,
सम्मुख आकर इक बार नहीं सौ बार प्रहार करो!
मत छुप कर वार करो!

चोटें कर-कर थक जाओगे,
पर मुझको जीत न पाओगे,
मुजको, मेरी हस्ती को भी तुम चाहे छार करो !
मत छुप कर वार करो!

यदि मेरी हार चाहते हो,
मुझ पर अधिकार चाहते हो,
तो मेरी दुर्बलताओं पर तुम प्यार-दुलार करो!
मत छुप कर वार करो!

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