मतभेद-भारत-भारती (अतीत खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Ateet Khand)

मतभेद-भारत-भारती (अतीत खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Ateet Khand)

 

इस भाँति भारतवर्ष ने गौरव दिखाया फिर नया,
पर हाय ! वैदिक-धर्म-रवि था बौद्ध-घन से घिर गया।
जैनादिकों से भी परस्पर भेद बढ़ता ही गया,
उस फूट के फल की प्रबल विष और चढ़ता ही गया ! ।।२१०।।

 

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