मजा बचपन का-कमलेश संजीदा -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kamlesh Sanjida

मजा बचपन का-कमलेश संजीदा -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kamlesh Sanjida

शब्द नहीं जिनको मैं,
लफ़्ज़ों में कह सकता हूँ
बच्चों की नटखटता को,
आँखों में बसा सकता हूँ॥

इनको जब भी मैं देखूं,
बस स्तब्ध सा रह जाता हूँ
भूलकर बस सारी दुनिया,
बच्चों में खो जाता हूँ ॥

कोई मुझसे कुछ भी कहे,
कहाँ मैं किसी की सुनता हूँ
ऐसे पलों को फिर से जी,
बचपन में जा सकता हूँ ॥

अब फिर से मैं तो,
मन का धनी हो ही सकता हूँ
जाकर बचपन में फिर से,
मज़ा बचपन का ले सकता हूँ ॥

सारी चिंता और फिकर को,
बस चुटकी में उड़ा सकता हूँ
उनकी तरह मुस्कुरा न सकूँ,
तो भी उनके संग खेल सकता हूँ ॥

रात और दिन के अंतर को,
कभी भी भुला सकता हूँ
जीवन जीने की इस कला को,
बस बच्चों के संग कर सकता हूँ ॥

भूलकर सारी दुनियाँदारी,
अब फिर से मैं रह सकता हूँ
जगाकर इस पागलपन को,
मजा बचपन का ले सकता हूँ ॥

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