मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

मछी तारू किआ करे पंखी किआ आकासु ॥
पथर पाला किआ करे खुसरे किआ घर वासु ॥
कुते चंदनु लाईऐ भी सो कुती धातु ॥
बोला जे समझाईऐ पड़ीअहि सिम्रिति पाठ ॥
अंधा चानणि रखीऐ दीवे बलहि पचास ॥
चउणे सुइना पाईऐ चुणि चुणि खावै घासु ॥
लोहा मारणि पाईऐ ढहै न होइ कपास ॥
नानक मूरख एहि गुण बोले सदा विणासु ॥१॥(143)॥

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