मउली धरती मउलिआ अकासु-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

मउली धरती मउलिआ अकासु-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

मउली धरती मउलिआ अकासु ॥
घटि घटि मउलिआ आतम प्रगासु ॥१॥
राजा रामु मउलिआ अनत भाइ ॥
जह देखउ तह रहिआ समाइ ॥१॥ रहाउ ॥
दुतीआ मउले चारि बेद ॥
सिम्रिति मउली सिउ कतेब ॥२॥
संकरु मउलिओ जोग धिआन ॥
कबीर को सुआमी सभ समान ॥३॥१॥1193॥

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