मंजिल तेरी राही तू चल।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

मंजिल तेरी राही तू चल।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

खा-खा ठोकर राहों पर चल
बाधाओं से राही मत टल,
देंगे मंजिल पग के छाले
तिमिर बीच प्रस्फुटित उजाले।
विघ्न सकल खुद ही जाते जल
मंजिल तेरी राही तू चल।

कहना नहीं, न होगा काम
मिहनत का होता अंजाम,
जहाँ हारता घड़ी – घड़ी है
आगे उसके जीत खड़ी है।
कदम बढ़ाओ निकलेगा हल
मंजिल तेरी राही तू चल।

खाक बनेंगे दुख – अंगार
सुख के मोती के अम्बार,
बढ़ने का उद्देश्य एक हो
और इरादा स्वच्छ, नेक हो।
यत्न न होगा तेरा निष्फल
मंजिल तेरी राही तू चल।

 

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