मंगलाचरण-नहुष -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Nahush

मंगलाचरण-नहुष -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Nahush

मंगलाचरण

क्योंकर हो मेरे मन मानिक की रक्षा ओह!
मार्ग के लुटेरे-काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह ।
किन्तु मैं बढ़ूँगा राम,-
लेकर तुम्हारा नाम ।
रक्खो बस तात, तुम थोड़ी क्षमा, थोड़ा छोह ।

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