मँगरू मियाँ के नए जोगीड़े-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Phanishwar Nath Renu

मँगरू मियाँ के नए जोगीड़े-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Phanishwar Nath Renu

“मँगरू मियाँ के नए जोगीड़े”
“ताक धिन्ना धिन, धिन्नक तिन्ना, ताक धिनाधिन
धिन्नक तिन्नक ।
जोगीजी सर – र – र, जोगीजी सर – र – र — —

एक रात में महल बनाया, दूसरे दिन फुलवारी
तीसरी रात में मोटर मारा, जिनगी सुफल हमारी
जोगीजी एक बात में, जोगीजी एक बात में,
जोगीजी भेद बताना., जोगीजी कैसे — कैसे ?

बाप. हमारा पुलिस सिपाही, बेटा है पटवारी
हाल साल में बना सुराजी, तीनों पुश्त सुधारी
जोगीजी सर – र – र —-

रूपया जोड़ा, पैसा जोड़ा, जोड़ी मैंने रेजगारी
जिसने मेरा भंडा फोड़ा, उसकी रोजी मारी
जोगीजी सर – र – र — –

खादी पहनो, चाँदी काटो, रहे हाथ में झोली
दिन दहाड़े करो डकैती, बोल सुदेशी बोली
जोगीजी सर – र – र ——

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