भ्रूणहत्या-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

भ्रूणहत्या-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

 

एक स्त्री
जिसकी कोख में पल रही
कल की रोशनी
चाँदनी रात सी
चमकती
रमणीय आँखों वाली
मृगनयनी
उसकी हत्या की गयी
खून की धार
नदी बन गयी
और स्त्री की
परछाईं
अपशगुन बन गयी
उसी पर जबरन
उसकी सौत बियाह
कर लायी गयी
वंश की दुहाई
उन मनुष्यों ने सुनायी
जिनकी देह की उपज
उसी स्त्री की देह से हुयी
गर्त में गिरती
उन दीवारों को रोक लो
वरना
अन्त
तुम्हारे करीब आ
चुका है
छूने भर की देरी
रह गयी है
पलकों के झपकने का
इंतजार मत करो
वरना
वो बन्द की बन्द
रह जाएगी

 

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