भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम

भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम ।
सन् सतासी नज़्र कर दें मज़हबी दंगों के नाम ।

दोस्त ! मलियाना में जाके देखिए,
दो क़दम ‘हिटलर’ से आगे है ये जम्हूरी निज़ाम ।

है इधर फ़ाक़ाकशी से रात का कटना मुहाल,
रक्स करती है उधर स्कॉच की बोतल में शाम ।

बम उगाएँगे ‘अदम’ देहकान गंदुम के एवज़,
आप पहुँचा दें हुकूमत तक हमारा ये पयाम ।

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