भाषा पहचान-नदी की बाँक पर छाया अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

भाषा पहचान-नदी की बाँक पर छाया अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

एक भिखारी ने
दूसरे भिखारी को सूचना दी:
उस द्वार जाओ, वहाँ भिक्षा ज़रूर मिलेगी।
बड़े काम की चीज़ है भाषा: उस के सहारे
एक से दूसरे तक जानकारी पहुँचाई जा सकती है।
वह सामाजिक उपकरण है।
पर नहीं। उस से भी बड़ी बात है यह
कि भाषा है तो एक भिखारी जानता है कि वह दूसरे से जुड़ा है
क्यों कि वह उस जानकारी को
साझा करने की स्थिति में है।
वह मानवीय उपलब्धि है।
हम सभी भिखारी हैं।
भाषा की शक्ति यह नहीं कि उस के सहारे
सम्प्रेषण होता है:
शक्ति इसमें है कि उस के सहारे
पहचान का यह सम्बन्ध बनता है जिस में
सम्प्रेषण सार्थक होता है।

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