भाशो जब भी बोलता है-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

भाशो जब भी बोलता है-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

 

मेरा कवि मित्र
भाशो
जब भी फोन करता है
यही बोलता है
सिर्फ कुछ बातें ही करनी हैं
ध्यान से सुनना।

फूलों गमलों में नहीं
क्यारियों में लगाया करो।
घुटनों पर बैठ
निराई-गुड़ाई करो
घुटनों में दर्द नहीं होगा कभी।
पानी दिया करो
देखो खिलते फूलों को।
क्यारियाँ किताबें बन जाती हैं।
पन्ना-पन्ना हर्फ़-हर्फ़
पढ़ो
बहुत सबक मिलते हैं।

रात में
नीले अंबर को निहारो
तारों से बात करते
अक्सर
मिल जाते
बिछड़े प्यारे साथी।
सपनों के लिहाफ़ लपेट
गर्म रहो।
पछतावे की ठंड मार डालती है।
सर्द हवाओं से
बचकर रहना जरूरी है।

चुप न रहो।
कोई जब पास न हो
तो दीवारों से करो गुफ़्तगू।
खुद को
खुद से ही जवाब देना सीखो
खुद से अच्छा कोई साथी नहीं।
आईने से बातचीत किया करो
इंसान चाहे तो
उम्र बाँध सकता है।

छोटे-छोटे बच्चों को
खेलते देखा करो।
छोटी सी दुनिया में
बहुत कुछ है जीने और जानने को
जिया करो।

रंगीन गुब्बारे बेचते
नंगे पांव
गलियों में आवाज़ देते
पिपनी बजाते बच्चों को
बच्चे न समझो।
इन्हें फुरसत नहीं
एक पल भी खेलकूद की।
गोल पहिया रोटी का
लिए घूमता है गली-गली इन्हें
इनके हिस्से की
वर्णमाला
खो गई थी
झुँझने की उम्र में।

अपने गमगीन साथियों से सावधान!
ये तुम्हारी इच्छाओं वाली
माचिस
नम कर देंगे
अपनी ठंडी आहों से।
न अगन न लगन
सिर्फ़ अलसाए से साये।

उड़ते हुए ख्वाबों को
चाहतों, साँसों में पिरोकर।
कुछ ज़िंदगी के और नजदीक हो लो।

शब्दों से खेलता इंसान
वृद्ध नहीं होता
कविता लिखा करो।

बड़े भाई साहब!
मैं भी रिटायर हो गया
बच्चे पढ़ाता-पढ़ाता
जिस गाँव में पढ़ाया
वहाँ यही समझ आया
कि हमारे शहरों से
गाँव अब भी स्वच्छ हैं।
तभी तो जब भी उकता सा जाता हूँ
किसी गाँव में चला जाता हूँ
फसलों से बात करता हूँ
माँगता हूँ मौसम बसंती
सरसों से
कविता में पिरोने को
धूप सेंकता हूँ
कि पिघला सकूँ जज़्बे
चौपाल में बैठ रिश्ते बुनता
सूरज छिपते लौट आता हूँ।
आप भी जाया करो
गाँव
हर गाँव इंतजार में रहता है

नोट करना!
शहर कभी किसी का इंतजार नहीं करते
सिर्फ ठिकाना देता है।
शहर में रह कर भी
मैंने अपने अंदर से गाँव नहीं मरने दिया।
आप भी जिंदा रखना।
कविता
लिखते समय शहर
मेरे हाथ से मछली सा फिसल जाता है।
गाँव बस गया है आत्मा में
आपकी तरह।
सुस्ती कमजात को
फटकने न देना पास
दीमक की
तरह चाट जाती है इंसान के अंदर का उत्साह।
जीने का शौंक, उमंग
याद रखो, वक़्त आपका है।
कुत्ते को सैर ही तो नहीं करवाए जा रहे
बच के रहना
संगत असर छोड़ जाती है।
कुत्ते के साथ रहते
हुक्म चलाने की आदत पड़ जाती है।
बच के रहना।

धूप सेका करो!
सूरज से बात किया करो।
बड़ों की संगत से
असीमित उर्जा मिलती है।
सूरज की पिचकारी से
सीखो
फूलों में रंग
भरने का तरीका।
फलों का रसभरा संसार पहचानो।
मेरी
बातों पर गौर करना।

 

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