भार बन रहा जीवन मेरा-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

भार बन रहा जीवन मेरा-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

भार बन रहा जीवन मेरा।

था चिर तममय जब जीवन-मग,
कुछ अभ्यस्त हो चले थे पग,
आशा-दीपक ने क्षन को जल किन्तु कर दिया और अंधेरा।
भार बन रहा जीवन मेरा।

अब तो पथ भी नहीं दिखाता,
पग उठ-उठ कर है रह जाता,
प्राण-विहग फिर कहाँ बैठकर कर ले क्षण-भर रैन-बसेरा?
भार बन रहा जीवन मेरा।

आंधी भी तो बढ़ती, आती,
जग पर घोर तिमिर बरसाती,
क्षन में तम से ढंक जायेगा, साथी, अन्तर मेरा-तेरा।
भार बन रहा जीवन मेरा।

Leave a Reply