भारत के चप्पे-चप्पे पर-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh 

भारत के चप्पे-चप्पे पर-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh

 

भारत के चप्पे – चप्पे पर
सबल सजग सरदार खड़ा है ।
सब चीजों से देश बड़ा है ।।

माता – पिता, बंधु या बांधव,
जाति-पाँति, भाषा, मत, धर्म
सभी महत्त्वपूर्ण हैं लेकिन,
सबसे बड़ा देश का कर्म;
देश-कर्म का पालन करना
हर हालत में नियम कड़ा है ।
सब चीजों से देश बड़ा है ।।

धन-दौलत, जीवन या तन-मन,
स्वाभिमान, सम्मान धरोहर;
सभी हमें प्रिय, किंतु सभी से
प्रियतर अपना देश मनोहर;
निखिल विश्व के सीस-मुकुट में
हीरे जैसा स्वयं जड़ा है ।
सब चीजों से देश बड़ा है ।।

 

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