भाई-कविता-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov) 

भाई-कविता-रसूल हमज़ातोव-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rasul Gamzatov(Rasool Hamzatov)

आज से बारह बरस पहले बड़ा भाई मिरा
सतालिनगराद की जंगाह में काम आया था
मेरी मां अब भी लिये फिरती है पहलू में ये ग़म
जब से अब तक है वह तन पे रिदा-ए-मातम
और उस दुख से मेरी आंख का गोशा तर है
अब मेरी उमर बड़े भाई से कुछ बढ़कर है

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