भले आए-सागर-मुद्रा अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

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राम जी भले आये-ऐसे ही
आँधी की ओट में
चले आये बिन बुलाये।
आये, पधारो।

सिर-आँखों पर।
वन्दना सकारो।
ऐसे ही एक दिन
डोलता हुआ आ धमकूँगा मैं
तुम्हारे दरबार में:

औचक क्या ले सकोगे
अपनी करुणा के पसार में?

जनवरी, 1969

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