भय-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

भय-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

कहीं तुम दूर न चली जाना
छोड़ कर जीवन के इस मोड़ पर
क्यों लगता है, हर आहट पर तुम हो
कुछ और जी लें समय को तोड़ कर

रजनीगंधा के गोल गुलदस्ते
कल सपने में चढ़ मन मसल गए
दूर खड़ा मैं देखता रहा उन्हें पत्थर पर रखते
और अँधेरे में बस गुमसुम आंसू निकल गए

मैं अकेला निर्जन में निष्प्राण खड़ा
तुम्हे देखता रहा पर छू न सका
तुम आस-पास ही थी पर यह कैसी विडंबना
कि मै तुमसे कुछ कह न सका

प्रकृति तो सच है सब जानते हैं
पर तुम्हारे बिना यह जीवन नहीं है
चलो जहाँ हो साथ ही चलते हैं
तुम हो तो स्वर्ग भी यहीं है

Leave a Reply